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मंगलवार, 1 दिसंबर 2015

Poem Writing Workshop/ कविता लेखन कार्यशाला

|| कविता लेखन कार्यशाला-1 ||
(Poem writing workshop -1)
प्रस्तुति: पवन सिंह बैश
Utkarsh Higher Secondary School
(नरवर, शिवपुरी म.प्र.)
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आज दिनाँक 01/12/2015 को विद्यालय (Utkarsh Higher Secondary School, Narwar (M.P.) में कविता लेखन कार्यशाला का आयोजन रखा गया। कक्षा 9 वीं के छात्र-छात्रों ने बहुत उत्सुकता के साथ इसमें भाग लिया और दिए गए विषय (प्रकृति/Nature) पर बेहतरीन कविताएँ लिखीं। बच्चों की सोच और उनके भावों से रूबरू होने का यह एक अच्छा माध्यम है। कविता अपने आप में जितनी क्लिष्ट है, उतनी ही आनंददायक भी, बशर्ते उसे समझा जाए, उसके मनोभावों और निहितार्थ को हृदयंगम किया जाए। कविता लेखन जैसी गतिविधि से बच्चों के अंतर्मन के भावों को समझने के अलावा उन्हें किसी भी क्षेत्र से एक वृहद् दृष्टिकोण के साथ जोड़ सकते हैं। उनकी दबी हुई प्रतिभा को निकाल कर, और निखारा जा सकता है। इस सब के साथ-साथ बच्चों के भाषायीे शब्दकोष में कुछ नए और प्रभावी शब्दों का समावेश हो जाता है। उनके दैनिक उपयोग के शब्दांशों में सुधार आता है। उनकी भाषा में निखार आता है और उनकी आंतरिक संवेदनाएँ सचेत हो जाती हैं। मनुष्य का सबसे अहम और आवश्यक गुण है उसकी संवेदनशीलता, जब तक कोई मनुष्य संवेदनाओं को नहीं समझ सकता तब तक वह मनुष्य की श्रेणी में एक प्रश्न चिह्न की तरह है। कविता संवेदनाओं की अभिव्यक्ति होती है, जो शब्दों की सरिता के रूप में प्रवाहित होकर कागजी धरातल पर फैलती हुई, नीरस हृदयों को भी भावों और विचारों से सराबोर करती हुई, नमी लेकर आँखों से निकलती है। एक सशक्त कविता किसी को भी संवेदी बना सकती है।
इसी क्रम में प्रस्तुत हैं "उत्कर्ष विद्यालय, नरवर" के कक्षा 9वीं की छात्र-छात्राओं द्वारा लिखित कुछ कविताएँ -

(1)
|| प्रकृति : एक दृश्य ||
- ईशा जैन
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पेड़ हमारे जीवनदाता
सुबह जगाता सूरज प्यारा
रोशन करता सूर्य सभी को
चाँद, चाँदनी फैलता है जग में
पत्तों जैसा टूटता है
घमंड व्यक्ति का
समय आने पर
फूलों की खुशबू
भरती है उल्लास सभी में
प्रकृति बहुत खुशनुमा है
सभी के लिए
नदी बहती है जैसे
किसी दुखियारी की
आंसुओं की बाढ़-सी
प्रकृति का उपहार है जीवन
हम सबके लिए।

- ईशा जैन/ Esha jain, Narwar
कक्षा- 9वीं
(उत्कर्ष हायर सेकेंडरी स्कूल नरवर)

(2)
|| प्रकृति: एक दृश्य ||
- रोहित बैश
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हम प्रकृति के पालक हैं
ये पेड़ हमारे हैं
जब पेड़ों में फूल आते हैं
तो लगता है
प्रकृति सुन्दर है
जब प्रकृति को कोई
आहात करता है ... तो लगता है
हम अधूरे हैं।
जब प्रकृति को कोई निहारे
तो लगता है
हमारे जीवन में बहारें हैं
जब कोई तोड़ता है फूलों को
बेवज़ह ...
तो अंदर ही अंदर कुछ टूटता है
जब प्रकृति को छेड़ता है कोई
तो लगता है
माँ को छेड़ा है किसी ने
जब भी कोई हरियाली को तांके
तो लगता है
कोई 'अंदर' तांक रहा है।

- रोहित सिंह बैश/ Rohit Singh Baish
कक्षा - 9वीं
(उत्कर्ष हायर सेकंडरी स्कूल, नरवर)

(3)
|| प्रकृति: एक दृश्य ||
- आशी जैन

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मनुष्य का जीवन
प्रकृति की तरह है
जैसे, गर्मियाँ आते ही
पेड़ों के सारे पत्ते
झड़ जाते हैं
और वर्षा आते ही
पूरी प्रकृति
हरी-भरी हो जाती है
उसी तरह मनुष्य भी
मुसीबत में
हो जाता है उदास
प्रकृति के पतझड़ की तरह
और कभी-कभी
बसंत-सा सदाबहार भी।

- आशी जैन/ Ashi jain, Narwar
कक्षा- 9वीं
(उत्कर्ष हायर सेकंडरी स्कूल, नरवर)

(4)
|| प्रकृति: एक दृश्य ||
- भरतराम पाल

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प्रकृति हमें देती है
खुशियाँ, जो हैं चारों ओर
हम देखेंगे जब
सुंदरता इसकी
तो चकित रह जाएँगे
जब आता है बसंत
तो दिखता है
चेहरा इसका
जिसे देखकर, आश्चर्यचकित होते हैं
जब पहुँचते हैं
इसके आँचल में
तो लगता है, कहाँ हैं?
जब सोचता हूँ
तो भ्रम होता है
कि ऐसा भी है?
विश्वास नहीं होता,
कि हम प्रकृति में हैं।

- भरतराम पाल/ Bharatram Pal, Narwar
कक्षा- 9वीं
(उत्कर्ष हायर सेकंडरी स्कूल, नरवर)

(5)
|| प्रकृति: एक दृश्य ||
- सचिन सिंह बैश

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प्रकृति में है चारों ओर
कहीं हैं पंछी,
कहीं है मोर।

बच्चे मचा रहे हैं शोर
अँधेरा छा रहा है घोर
प्रकृति में है चारों ओर।

जैसे पंछी उड़ रहे हैं
आसमान में
उड़ता है घमंड तुम्हारा भी
आसमान में
अगर कोई काट दे
पेड़ों को
दिल में होता है दर्द
हमारे भी।
कोई तो उनको देता जोर
प्रकृति में है चारों ओर।

- सचिन बैश/ Sachin Baish, Narwar
कक्षा- 9वीं
(उत्कर्ष हायर सेकंडरी स्कूल, नरवर)

(6)
|| प्रकृति: एक दृश्य ||
- कुमकुम झा

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प्रकृति बहुत सुन्दर है
आसमान में,
रंग-बिरंगी चिड़ियाँ
सजाती हैं आसमान को
जब उनकी मधुर ध्वनि
मन सुनता है
तो प्रफुल्लित हो उठता है
प्रकृति आनंददायक है
हमें इसे सुंदर बनाना है
और अधिक सुन्दर
जब हम इसे खुश रखेंगे
तब यह हमें भी खुश रखेगी।

- कुमकुम झा/ kumkum jha, Narwar
कक्षा- 9 वीं
(उत्कर्ष हायर सेकंडरी स्कूल, नरवर)

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